N. R. Sagar Archive

अभिलाषा / एन. आर. सागर

हाँ-हाँ मैं नकारता हूँ ईश्वर के अस्तित्व को संसार के मूल में उसके कृतित्व को विकास-प्रक्रिया में उसके स्वत्व को प्रकृति के संचरण नियम में उसके वर्चस्व को, क्योंकि ईश्वर एक मिथ्या विश्वास है एक आकर्षक कल्पना है अर्द्ध-विकसित अथवा …

तब तुम्हें कैसा लगेगा? / एन. आर. सागर

दि तुम्हें ज्ञान के आलोक से दूर अनपढ़-मूर्ख बनाकर रखा जाए, धन-सम्पति से कर दिया जाए- वंचित छीन लिए जाएँ अस्त्र-शस्त्र और विवश किया जाए हीन-दीन अधिकारविहीन जीवन जीने को तब तुम्हें कैसा लगेगा ? यदि- तुम्हारे खेत-खलिहान, मकान-दुकान लूट …