Jagdish Gupt Archive

सच हम नहीं सच तुम नहीं / जगदीश गुप्त

सच हम नहीं सच तुम नहीं सच है सतत संघर्ष ही । संघर्ष से हट कर जिए तो क्या जिए हम या कि तुम। जो नत हुआ वह मृत हुआ ज्यों वृन्त से झर कर कुसुम। जो पंथ भूल रुका …

हिम नहीं यह / जगदीश गुप्त

हिम-जलद, हिम-श्रृंग हिम-छिव, हिम-दिवस, हिम-रात, हिम-पुलिन, हिम-पन्थ; हिम-तरू, हिम-क्षितिज, हिम-पात। आँख ने हिम-रूप को जी-भर सहा है। सब कहीं हिम है मगर मन में अभी तक स्पन्दनों का उष्ण-जलवाही विभामय स्त्रोत अविरल बह रहा है हिम नहीं यह – इन …