Iqbal Suhail Archive

असीरों में भी हो जाएँ जो कुछ आशुफ़्ता-सर पैदा / इक़बाल सुहैल

असीरों में भी हो जाएँ जो कुछ आशुफ़्ता-सर पैदा अभी दीवार-ए-ज़िंदाँ में हुआ जाता है दर पैदा किए हैं चाक-ए-दिल से बू-ए-गुल ने बाल ओ पर पैदा हवस है ज़िंदगानी की तो ज़ौक-ए-मर्ग कर पैदा ये मुश्त-ए-ख़ाक अगर कर ले …

अब दिल को हम ने बंदा-ए-जानाँ बना दिया / इक़बाल सुहैल

अब दिल को हम ने बंदा-ए-जानाँ बना दिया इक काफ़िर-ए-अज़ल को मुसलमाँ बना दिया दुश्वारियों को इश्क़ ने आसाँ बना दिया ग़म को सुरूर दर्द को दरमाँ बना दिया इस जाँ-फ़ज़ा इताब के क़ुर्बान जाइए अबरू की हर शिकन को …