Habib Jalib Archive

ये ठीक है कि तेरी गली में न आयें हम / हबीब जालिब

ये ठीक है कि तेरी गली में न आयें हम. लेकिन ये क्या कि शहर तेरा छोड़ जाएँ हम. मुद्दत हुई है कूए बुताँ की तरफ़ गए, आवारगी से दिल को कहाँ तक बचाएँ हम. शायद बकैदे-जीस्त ये साअत न …

और सब भूल गए हर्फे-सदाक़त लिखना / हबीब जालिब

और सब भूल गए हर्फे-सदाक़त लिखना रह गया काम हमारा ही बगावत लिखना न सिले की न सताइश की तमन्ना हमको हक में लोगों के हमारी तो है आदत लिखना. हम ने तो भूलके भी शह का कसीदा न लिखा …