Ehtisham Husain Archive

डर डर के जिसे मैं सुन रहा हूँ / एहतिशाम हुसैन

डर डर के जिसे मैं सुन रहा हूँ खोई हुई अपनी ही सदा हूँ हर लम्हा-ए-हिज्र इक सदी था पूछो न कि कब से जी रहा हूँ जब आँख में आ गए हैं आँसू ख़ुद बज़्म-ए-तरब से उठ गया हूँ …

अक़्ल पहुँची जो रिवायात के काशाने तक / एहतिशाम हुसैन

अक़्ल पहुँची जो रिवायात के काशाने तक एक ही रस्म मिल काबा से बुत-ख़ाने तक वादी-ए-शब में उजालों का गुज़र हो कैस दिए जलाए रहों पैग़ाम-ए-सहर आने तक ये भी देखा है कि साक़ी से मिला जाम मगर होंट तरसे …