Ehsan Danish Archive

बख़्श दी हाल-ए-ज़ुबूँ ने जल्वा-सामानी मुझे / एहसान दानिश

बख़्श दी हाल-ए-ज़ुबूँ ने जल्वा-सामानी मुझे काश मिल जाए ज़माने की परेशानी मुझे ऐ निगाह-ए-दोस्त ऐ सरमाया-दार-ए-बे-ख़ुदी होश आता है तो होती है परेशानी मुझे खुल चुका हाँ खुल चुका दिल पर तिरा रंगीं फ़रेब दे न धोका ऐ तिलिस्म-ए-हस्ती-ए-फ़ानी …

आज भड़की रग-ए-वहशत तिरे दीवानों की / एहसान दानिश

आज भड़की रग-ए-वहशत तिरे दीवानों की क़िस्मतें जागने वाली हैं बयाबानों की फिर घटाओं में है नक़्क़ारा-ए-वहशत की सदा टोलियाँ बंध के चलीं दश्त को दीवानों की आज क्या सूझ रही है तिरे दीवानों को धज्जियाँ ढूँढते फिरते हैं गरेबानों …