Chandra Rekha Ddwal Archive

अपने होने से / चंद्र रेखा ढडवाल

वह समझ नहीं पाती कि वह क्या चाहती है क्योंकि सुबह दूसरों के चाहने से शुरू होती एक काम के लिए कहीं पहुँचती पा जाती है कुछ और उससे भी ज़्यादा ज़रूरी एक हाँक का उत्तर देते दूसरी को सुनती …