Balli Singh Cheema Archive

रोटी माँग रहे लोगों से / बल्ली सिंह चीमा

रोटी माँग रहे लोगों से, किसको ख़तरा होता है । यार, सुना है लाठी-चारज, हलका-हलका होता है । सिर फोड़ें या टाँगें तोड़ें, ये कानून के रखवाले, देख रहे हैं दर्द कहाँ पर, किसको कितना होता है । बातों-बातों में …

ले मशालें चल पड़े हैं लोग मेरे गाँव के / बल्ली सिंह चीमा

ले मशालें चल पड़े हैं लोग मेरे गाँव के । अब अँधेरा जीत लेंगे लोग मेरे गाँव के । कह रही है झोपडी औ’ पूछते हैं खेत भी, कब तलक लुटते रहेंगे लोग मेरे गाँव के । बिन लड़े कुछ …