Baljeet Singh Muntazir Archive

समन्दर में सफ़र के वक़्त कोई नाव जब उलटी / बलजीत सिंह मुन्तज़िर

समन्दर में सफ़र के वक़्त कोई नाव जब उलटी । तो उस दम लोग कहते हैं नहीं मौजों की कुछ ग़लती । तुफ़ानी हाल तो केवल कभी बरसों में बनते हैं, शकिस्ता कश्तियाँ तो ठहरे पानी में नहीं चलती । …

ज़िन्दगानी के भी कैसे-कैसे मंज़र हो गए / बलजीत सिंह मुन्तज़िर

ज़िन्दगानी के भी कैसे-कैसे मंज़र हो गए । बे-सरोसामाँ तो थे ही, अब तो बेघर हो गए । तुमसे मिलने पर बड़े आशुफ़्तासर थे उन दिनों, तुमसे बिछड़े तो हमारे दर्द बेहतर हो गए । एक क़तरे भर की आँखों …