हसरत ऐ जाँ शब-ए-जुदाई है / फ़कीर मोहम्मद ‘गोया’

हसरत ऐ जाँ शब-ए-जुदाई है
मुज़दा ऐ दिल के मौत आई हैं

फिर गया जब से वो सनम ब-ख़ुदा
हम से बर्गश्‍ता इक ख़ुदाई है

तुम मेरे कज़-कुलाह को देखो
ये भला किस में मीरजाई है

दिल में आता है राह-ए-चश्‍म से वो
ख़ूब-ये राह-ए-आशनाई है

ज़ाहिदो कुदरत-ए-ख़ुदा देखो
बुत को भी दावा-ए-ख़ुदाई है

काबे जाने से मना करते हैं
क्या बुतों के ही घर ख़ुदाई है

हुस्न ने मुल्क-ए-दिल किया ताराज
हज़रत-ए-इश्‍क़ की दुहाई है

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