साग पकाया / सत्य प्रकाश कुलश्रेष्ठ

बंदर गया खेत में भाग,
चुट्टर-मुट्टर तोड़ा साग।
आग जला कर चट्टर-मट्टर,
साग पकाया खद्दर-बद्दर।
सापड़-सूपड़ खाया खूब,
पोंछा मु हूँह उखाड़ कर दूब।
चलनी बिछा, ओढ़कर सूप,
डटकर सोए बंदर भूप!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *