अन्नू का तोता / संत कुमार टंडन ‘रसिक’

‘बाबा, बाबा’ बोला पोता,
‘लाल, दुलारे तू क्यों रोता?’
‘ला दो पिंजला, ला दो तोता
बला नहीं, बछ छोता-छोता।’

अन्नू जी ने गाना छोड़ा,
अन्नू जी ने खाना छोड़ा,
बाबा साहब से की कुट्टी
दादा से भी हो गई छुट्टी।

अन्नू जी का तोता आया
पिंजड़े में उसको बैठाया,
तनिक न तोते के मन भाया
पानी पिया, न दाना खाया!

‘सीता-राम’ न पट्टू बोले
बंद न अपनी आँखें खोले,
चुमकारें या उसे चहेंटे-
चीख-चीखकर बोले ‘टें-टें।’

अन्नू ने छोड़ी शैतानी
उसको हुई बड़ी हैरानी,
पानी पिए न दाना खाए
‘राम’ न बोले, बस चिल्लाए!

‘कौन, कहाँ, तोते के पापा?
दद्दा होंगे इसके बाबा।’
‘लाल दुलारे, वे हैं वन में,
इसीलिए दुख इसके मन में।’

अब न करूँगा मैं मनमानी
अन्नू की आँखों में पानी,
पिंजड़ा खोला, बोले, ‘आ-आ,
बहुत सताया तुझको जा-जा।’

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *